आकाश तत्व
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आकाश तत्व का स्थान है - विशुद्धि केंद्र ( विशुद्धिचक्र ) |
शरीर के पोले भाग में यह तत्व विद्दमान है |
मध्यमा अंगुली को अंगूठे से दबाने पर शरीर में
आकाश तत्व सक्रिय होता है |
इसकी सक्रियता से आध्यात्मिक जागरण होता है,
शरीर कांतिमय बनता है और
स्वभाव में उदारता आती है |
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फुफ्फुस, यकृत और पित्ताशय पर इसका नियंत्रण है |
इसके आधिक्य से निराशा, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और
मानसिक बीमारियां होती हैं |
इस तत्व का प्रभुत्व होने से मानसिक शक्तियों
का जागरण होता है |
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आकाश तत्व का स्थान है - विशुद्धि केंद्र ( विशुद्धिचक्र ) |
शरीर के पोले भाग में यह तत्व विद्दमान है |
मध्यमा अंगुली को अंगूठे से दबाने पर शरीर में
आकाश तत्व सक्रिय होता है |
इसकी सक्रियता से आध्यात्मिक जागरण होता है,
शरीर कांतिमय बनता है और
स्वभाव में उदारता आती है |
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फुफ्फुस, यकृत और पित्ताशय पर इसका नियंत्रण है |
इसके आधिक्य से निराशा, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और
मानसिक बीमारियां होती हैं |
इस तत्व का प्रभुत्व होने से मानसिक शक्तियों
का जागरण होता है |
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