स्वर्ग को जलाने
और
नरक को डुबोने जा रही हूं |
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'राबिया' एक सूफी साधिका थी |
वह एक हाथ में मशाल और एक हाथ में
पानी की बाल्टी लेकर भागी जा रही थी |
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लोगों ने पूछा -
" आज क्या मामला है ?"
'राबिया' ने कहा -
" स्वर्ग को जलाने और नरक को डुबोने जा रही हूं |"
लोगों ने पूछा - " किसलिए ?"
कहा -
" तुम्हारे धर्म के मध्य में ये दो महान व्यवधान हैं |
१. नरक का भय
२. स्वर्ग का प्रलोभन,
व्यक्ति इन दोनों से मुक्त हो कर ही शुद्ध, सत्य धर्म का स्पर्श कर सकता है |
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कामना से मुक्त होने के बाद जो प्रवृत्ति होती हैं,
वह वास्तविक प्रवृत्ति होती है |
उसमें कोई आकांक्षा-प्रत्याशा नहीं रहती |
फलाकांक्षा और प्रत्याशा से मुक्त होने का पाठ |
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प्रलोभन देकर आदमी से कुछ भी कराया जा सकता है |
धर्म के नाम पर या धर्म होगा --
बस इतना सुनना चाहिए,
मनुष्य का मन द्रवित हो जाता है |
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व्यक्ति अपनी बुद्धि को भ्रमित न करे |
यह भी न भूले कि जीवन का ध्येय है --
समस्त आशंसा से मुक्त होना |
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