Thursday, July 11, 2013

प्रतिक्रया विरति

प्रतिक्रया विरति
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प्रतिक्रिया कायिक, वाचिक और मानसिक --
इन तीन स्तरों पर होती है |
वह अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रकार की होती है |
उसका मनोकायिक ( mental-physical ) संतुलन पर प्रभाव होता है |
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प्रतिक्रिया का परिणाम उसकी तरतमता के आधार पर होता है |
मंद प्रतिक्रिया का परिणाम मंद और
तीव्र प्रतिक्रिया का परिणाम तीव्र होता है |
उसे पत्थर की रेखा, मिटटी की रेखा, बालू की रेखा
और पानी की रेखा के उदाहरण से समझा जा सकता है |
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प्रतिक्रया के परिणाम को ध्यान में रखकर ध्यान करने वाले
व्यक्ति को उससे बचने का अभ्यास करना चाहिए |
- आचार्य श्री महाप्रज्ञजी

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