Thursday, July 11, 2013

जिसकी आज जरूरत थी

महावीर भगवान की २६०० वीं जयंती पर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी द्वारा रचित -
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जिसकी आज जरूरत थी उसने क्यों पहले अवतार लिया ?
मंद चांदनी चंदा की क्यों सूरज को उपहार दिया ?
जिसकी आज.........
१. तुम आये तब इस धरती ने अपना रूप संवारा था,
मनुज-एकता की वाणी से उसको मिला सहारा था |
मानव अपना भाग्य विधाता पौरुष को आधार दिया |
जिसकी आज .....
२. जटिल समस्या के इस युग को उस युग से कैसे तोलें,
हिंसा से बहरी दुनिया में बोलें तो कैसे बोलें |
पोत कहां वह जिससे तुमने इस सागर को पार किया ?
जिसकी आज.....
३. करुणा का जल सूख रहा है, दुर्लभ पीने का पानी,
बना रहा बाज़ार आज के ज्ञानी को भी अज्ञानी |
भोगवाद के महारोग का प्रभु कैसे उपचार किया ?
जिसकी आज.....
४. उतरो, उतरो हे करुणाकर! हृदयांगण में तुम उतरो,
अभय-मन्त्र के उद्गाता अणु-युग के भय को दूर करो |
मैत्री की निर्मल धारा ने शान्ति-शोध को द्वार दिया |
जिसकी आज.....
५. ऋद्धि-सिद्धि का वर दो, वर दो, वर्धमान का पद पाएं,
सहनशील बन विक्रमशाली महावीर हम बन पाएं |
अनेकांत ने निराकार को पल भर में आकार दिया |
जिसकी आज जरूरत थी उसने क्यों पहले अवतार लिया ?
लय : बाजरे री रोटी पोई

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