Sunday, July 14, 2013

वायु तत्व


वायु तत्व
---------
वायु तत्व का स्थान है - आनंदकेंद्र ( अनाहत चक्र ) |
यह समूचे शरीर में व्याप्त है |
तर्जनी अंगुली को अंगूठे के मूल में दबाने पर शरीर
में वायु तत्व सक्रिय होता है |
इसकी सक्रियता से स्फूर्ति रहती है,
प्राणशक्ति प्रबल बनती है,
शारीरिक शक्ति मज़बूत होती है |
--------------------------------
घ्राण शक्ति पर इस तत्व का नियंत्रण है |
इसकी अधिकता से गले व छाती का दर्द,
बुखार, कब्ज़, हिचकी, लकवा और गठिया
आदि रोग उत्पन्न होते हैं |
इसके प्राधान्य से नकारात्मक विचार व
मानसिक तनाव पैदा होता है |
-----------------------------
२१ सितम्बर से २३ दिसंबर तक शरीर में वायुतत्व की प्रधानता रहती है |
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी


No comments:

Post a Comment