वरदान बनी गुरु वाणी
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प्रसंग है सन २००९ !
लाडनूं चतुर्मास !
मैं गुरुदेव ( आचार्य श्री महाप्रज्ञजी ) के चरणों में पहुंची |
आचार्यवर की करुणामयी दृष्टि देखकर सहसा मेरे मन में आया -
क्यों न मैं अपनी आँखों के बारे में गुरुदेव से समाधान प्राप्त करूं |
लगभग ६ महीनों से लगातार वेदना मेरे लिए असह्य हो रही थी |
मैं गुरुदेव के सामने चुपचाप खड़ी रही |
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तभी गुरुदेव की सेवा में खड़े मुनिश्री किशनलालजी ने कहा -
" कुछ पूछना है, पूछ लो |"
तभी गुरुदेवश्री ने पुछवाया -
" क्या हुआ ?"
मैंने निवेदन किया -
" आंखों की वेदना ठीक नहीं हो रही है |"
गुरुदेव ने वत्सलतापूर्वक पुछवाया -
" कहां दिखाया, डाक्टर क्या कहते हैं ?"
मैंने कहा -
" डा. काला पानी बताते हैं |
पर दवाई से फर्क नहीं पड़ रहा है |"
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गुरुदेव ने असीम कृपादृष्टि बरसाते हुए फरमाया -
" ठीक है |"
कुछ क्षण रूककर दोनों हाथों से आशीर्वाद प्रदान करते हुए
फरमाया -
" ठीक है, जप का प्रयोग करो |"
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गुरु के आशीर्वाद अमृतमय वचनों का पान कर अपार आनंदानुभूति हुई |
गुरुवचनों पर दृढ विश्वास और संकल्प के साथ जप प्रयोग शुरू करने
के कुछ ही दिनों में आंखें ठीक हो गई |
सबको आश्चर्य हुआ |
ऐसा लगा कभी दर्द हुआ ही नहीं |
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पुनः डाक्टर को दिखाया |
रिपोर्ट में सब सामान्य था |
गुरुदेव की वाणी मेरे लिए वरदान बन गई |
सचमुच गुरुवचनों पर श्रद्धा निश्चित ही सुफल देने वाली होती है,
इसका साक्षात अनुभव हुआ |
- मुमुक्षु गुणश्री
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