आश्चर्य !!! पात्र भरा ही नहीं
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एक सन्यासी भिक्षा मांगता हुआ राजा के द्वार पहुंचा |
उससे पूछा गया - राजा के द्वार पर आये हो, तुम्हे क्या चाहिए ?
फकीर बोला - ज्यादा कुछ नहीं,
यह मेरा भिक्षापात्र है;
इसे किसी चीज से भर दो |
राजा के यहाँ दाल, आटा या चावल से क्यों भरा जाता ?
राजा ने आदेश दिया कि भिक्षापात्र को सोने, चांदी से भर दिया जाए |
राज्यकर्मियों ने आदेश का पालन किया |
किन्तु .....
आश्चर्य !
पात्र भरा ही नहीं |
राजा ने रहस्य जानना चाहा |
फकीर ने कहा -
राजन !
यह पात्र भरेगा नहीं |
यह कोई सामान्य पात्र नहीं है |
यह मनुष्य की खोपड़ी है,
यह कभी भरती ही नहीं |
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
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एक सन्यासी भिक्षा मांगता हुआ राजा के द्वार पहुंचा |
उससे पूछा गया - राजा के द्वार पर आये हो, तुम्हे क्या चाहिए ?
फकीर बोला - ज्यादा कुछ नहीं,
यह मेरा भिक्षापात्र है;
इसे किसी चीज से भर दो |
राजा के यहाँ दाल, आटा या चावल से क्यों भरा जाता ?
राजा ने आदेश दिया कि भिक्षापात्र को सोने, चांदी से भर दिया जाए |
राज्यकर्मियों ने आदेश का पालन किया |
किन्तु .....
आश्चर्य !
पात्र भरा ही नहीं |
राजा ने रहस्य जानना चाहा |
फकीर ने कहा -
राजन !
यह पात्र भरेगा नहीं |
यह कोई सामान्य पात्र नहीं है |
यह मनुष्य की खोपड़ी है,
यह कभी भरती ही नहीं |
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
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