Thursday, July 11, 2013

मेरे शिक्षा गुरु

मेरे शिक्षा गुरु 
आचार्य श्री तुलसी मेरे शिक्षा गुरु थे |
मुझे दुसरे साधू भोला समझते थे |
मैं भोला अवश्य था,
पर वे जितना समझते थे उतना नहीं था |
कपट, प्रपंच, छलना और प्रवंचना से मुझे बहुत घृणा थी |
मैं सबके प्रति निश्छल व्यवहार करना पसंद करता था |
मैंने अपने लिए सफलता के कुछ सूत्र निश्चित किये थे |
१. मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा, जो मेरे विद्या गुरु को अप्रिय लगे |
२. मैं ऐसा कोई काम नहीं करूँगा, जिससे मेरे विद्या गुरु को यह सोचना पड़े कि
मैंने जिस व्यक्ति को तैयार किया, वह मेरी धारणा के अनुरूप नहीं बन सका |
३. मैं किसी भी व्यक्ति का अनिष्ट चिंतन नहीं करूँगा |
मेरी यह निश्चित धारणा हो गई थी -
दुसरे का अनिष्ट चाहनेवाला उसका अनिष्ट कर पाता है या नहीं कर पाता,
किन्तु अपना अनिष्ट निश्चित ही कर लेता है |

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