Thursday, July 11, 2013

मिताहार और मितभाषण

मिताहार
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आहार का सम्बन्ध केवल पोषण और स्वास्थ्य के साथ ही नहीं है,
उसका सम्बन्ध मन और भाव के साथ में हैं |
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ध्यान करने वाले व्यक्ति को आहार के विषय में
सामान्य जानकारी अवश्य होनी चाहिए |
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मित आहार आहारबोध का सांकेतिक शब्द है |
आहार में मात्र का विवेक रखने वाला व्यक्ति
ध्यान की साधना में प्रगति कर सकता है |
मितभाषण
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वाणी हमारे विकास का माध्यम है |
साधना की दृष्टि से विचार करें तो
वह चंचलता बढाने वाली है |
जो अचंचल होने की साधना करना चाहता है
उसके लिए वाणी की चंचलता को कम करना जरुरी है |
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मनुष्य के बहुत सारे प्रयोजन वाणी से जुड़े हुए हैं |
वह सदा सर्वदा मौन रहे यह संभव नहीं है |
फिर भी यथावकाश यथोचित वाणी का संयम करे,
यह आवश्यक है |
मितभाषण उसी का प्रयोग है |

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