आचार्य श्री महाप्रज्ञजी परिवर्तन के क्रम को अनिवार्य मानते हैं |
इस क्रम में आश्चर्य के लिए कोई अवकाश नहीं है |
उदय-अस्त - इस विषय पर उनकी कविता का अनुवाद -
" सूर्य के अस्त होने पर चंद्रमा उदित होता है
और
चन्द्रमा के अस्त होने पर सूर्य उदित होता है |
इसमें आश्चर्य क्या है ?
क्योंकि संसार की यही रीति है कि
कोई उदित होता है और कोई अस्त |
इस क्रम में आश्चर्य के लिए कोई अवकाश नहीं है |
उदय-अस्त - इस विषय पर उनकी कविता का अनुवाद -
" सूर्य के अस्त होने पर चंद्रमा उदित होता है
और
चन्द्रमा के अस्त होने पर सूर्य उदित होता है |
इसमें आश्चर्य क्या है ?
क्योंकि संसार की यही रीति है कि
कोई उदित होता है और कोई अस्त |
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