Wednesday, July 10, 2013

एकाग्रता के दो रूप

एकाग्रता के दो रूप
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एक बगुला मछली को पकड़ने के लिए एकाग्र हो जाता है |
क्या यह ध्यान है ?
अवश्य !
तो बगुला भी अंतर्मुखी हो जाता है ?
नहीं !
उसका ध्यान बहिर्मुखी है,
आसक्ति से जुड़ा हुआ है |
इसीलिए भगवान् महावीर ने
ध्यान को दो श्रेणियों में विभक्त कर दिया --
आर्त्त ध्यान और धर्म्य ध्यान |

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