आराधक और विराधक
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इन दोनों के तात्पर्य को समझने के लिए दो शब्द और ज्ञातव्य है -
आराधना और
विराधना |
स्वीकार की गई अध्यात्म-साधना में सफल हो जाना,
उत्तीर्ण हो जाना आराधना है |
साधना-पथ में असफल-अनुत्तीर्ण हो जाना विराधना है |
साधना में सफल साधक आराधक और
असफल साधक विराधक कहलाता है |
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आराधना के तीन प्रकार है -
१. ज्ञान आराधना
२. दर्शन आराधना
३. चारित्र आराधना
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* इसका सम्बन्ध वर्त्तमान और भावी -
दोनों जन्मों के साथ जुड़ा हुआ है |
जो साधू और श्रावक वर्तमान जीवन में
ज्ञान, दर्शन और चारित्र की सम्यक आराधना करता है,
वह सदगति प्राप्त करता है |
अगले जीवन में पहले की अपेक्षा अधिक आत्मिक-विकास करता है |
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जो ज्ञान, दर्शन और चारित्र की विराधना करता है,
वह विराधक बन जाता है |
उसकी भावी यात्रा दुर्गति की ओर ले जानी वाली होती है |
उसका भावी जीवन विकासशील नहीं होता |
भविष्य धुंधला हो जाता है |
इसलिए प्रत्येक समझदार धार्मिक व्यक्ति आराधक अवस्था में मृत्यु का वरन करना चाहता है |
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इन दोनों के तात्पर्य को समझने के लिए दो शब्द और ज्ञातव्य है -
आराधना और
विराधना |
स्वीकार की गई अध्यात्म-साधना में सफल हो जाना,
उत्तीर्ण हो जाना आराधना है |
साधना-पथ में असफल-अनुत्तीर्ण हो जाना विराधना है |
साधना में सफल साधक आराधक और
असफल साधक विराधक कहलाता है |
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आराधना के तीन प्रकार है -
१. ज्ञान आराधना
२. दर्शन आराधना
३. चारित्र आराधना
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* इसका सम्बन्ध वर्त्तमान और भावी -
दोनों जन्मों के साथ जुड़ा हुआ है |
जो साधू और श्रावक वर्तमान जीवन में
ज्ञान, दर्शन और चारित्र की सम्यक आराधना करता है,
वह सदगति प्राप्त करता है |
अगले जीवन में पहले की अपेक्षा अधिक आत्मिक-विकास करता है |
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जो ज्ञान, दर्शन और चारित्र की विराधना करता है,
वह विराधक बन जाता है |
उसकी भावी यात्रा दुर्गति की ओर ले जानी वाली होती है |
उसका भावी जीवन विकासशील नहीं होता |
भविष्य धुंधला हो जाता है |
इसलिए प्रत्येक समझदार धार्मिक व्यक्ति आराधक अवस्था में मृत्यु का वरन करना चाहता है |
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