Thursday, July 11, 2013

भावक्रिया

उपसंपदा
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भारतीय चिंतन में दीक्षा का बहुत महत्व है |
संकल्पसिद्धि और सफलता का अमोघ उपाय है |
दीक्षा के साथ संकल्प की चेतना जुड़ी हुई है |
प्रेक्षाध्यान का अभ्यास करनेवाला व्यक्ति
प्रारम्भ में उपसंपदा --


भावक्रिया [१]
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जिस क्रियाकाल में जो भाव होता है,
वह भाव पूर्ण क्रियाकाल में बना रहता है |
उस अवस्था में होने वाली क्रिया का नाम भावक्रिया है |
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क्रिया और मन दोनों भाव द्वारा संचालित होते हैं |
भावक्रिया में भाव, मन और क्रिया तीनों एक धारा में प्रवाहित होते हैं,
तीनों का सामंजस्य हो जाता है |
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भावक्रिया [२]
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क्रिया का क्षण वर्तमान का क्षण है |
क्रिया अतीत में नहीं होती,
केवल वर्तमान में ही होती है |
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भावक्रिया का एक अर्थ है वर्तमान में रहना |
वर्तमान में रहने का अर्थ है क्रिया के साथ भावधारा और
मन का संयोजन बनाए रखना |
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यदि क्रियाकाल में भावक्रिया के अनुरूप न रहे और
मन अन्यत्र चक्कर लगाता रहे,
इस स्थिति में क्रिया, भाव और मन का वियोजन होता है,
तनाव को पैदा होने का अवसर मिल जाता है |
भावक्रिया [३]
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कोई आदमी किसी कार्य को प्रारंभ करता है,
उसे आदि से अंत तक उस कार्य की स्मृति नहीं रहती |
इस विस्मृति का नाम है प्रमाद |
जागरूकता का अर्थ है सतत स्मृति अथवा अप्रमाद |
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भावक्रिया का दूसरा अर्थ है सतत स्मृति अथवा जागरूकता |
कल्पना करें -
किसी व्यक्ति ने आधा घंटा के लिए जप का प्रयोग शुरू किया |
उस आधा घंटा में निर्धारित जप चले,
दूसरा कोई विकल्प न आए,
यह बहुत कम संभव है |
जिस व्यक्ति ने भावक्रिया का अभ्यास नहीं किया है
उसके लिए वह संभव नहीं है |
यह किसी अतिशयोक्ति के बिना कहा जा सकता है |
भावक्रिया [४]
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जो काम करें, जानते हुए करें |
यह भावक्रिया का तीसरा अर्थ है |
मन के तीन प्रकार हैं - -
१. तन्मन - ध्येय में लगा मन
२. तदन्यमन - ध्येय से भिन्न वस्तु में लगा हुआ मन
३. नोअमन - लक्ष्यशून्य व्यापार
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क्रियाकाल में मन, की जाने वाली क्रिया में लगा रहता है |
उस स्थिति को कहा जा सकता है --
जानते हुए करना |
तन्मन इस अवस्था का वाचक है |
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भावक्रिया [५]
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भावक्रिया ध्यान का साधन भी है और
स्वयं ध्यान भी है |
वह जीवन की सफलता है और
स्वयं की सफलता है |
ध्यान का प्रयोग कालबद्ध है |
कोई भी व्यक्ति २४ घंटे ध्यान नहीं कर सकता |
भावक्रिया का प्रयोग काल से प्रतिबद्ध नहीं है |
वह दीर्घकाल तक किया जा सकता है |
२४ घंटे भी किया जा सकता है |
चलते-फिरते, उठते-बैठते, खाते-पीते हर क्रिया के साथ प्रयोग हो सकता है |
जरुरी है अभ्यास और संकल्प |
उसके बिना वह संभव नहीं |



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