Thursday, July 11, 2013

कष्ट बर्दाश्त नहीं होता

कष्ट बर्दाश्त नहीं होता -
राजा श्रेणिक का पुत्र मेघ कुमार जिस दिन दीक्षित हुआ, 
तो दीक्षा के क्रम से उसे दरवाजे के पास सोने की जगह दी गयी |
रात भर साधुओं के आवागमन से वो नींद न ले सका |
सवेरे ही सवेरे मेघ प्रभु महावीर के पास गया 
और
निवेदन किया कि
मुझसे साधुपन का कष्ट बर्दाश्त नहीं होता,
मैं वापस महल जा रहा हूँ |
प्रभु ने समझकर कहा - मेघ ! एक रात्री के कष्ट से तुम इतने विचलित हो गए,
पिछले जन्म में तू हाथी था
और
एक खरगोश पर करुणा की,
इसलिए अपना पैर भी नीचे नहीं किया
और
उसी हालत में मृत्यु को प्राप्त हुए |
मेघ को जाति स्मरण ज्ञान हुआ और प्रभु के चरणों में वंदन करके क्षमा मांगी |

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