अभिमान हिंसा है |
दूसरों को हीन और अपने को ऊंचा मानना वह उसका लक्षण है |
यह असमानता की प्रवृत्ति व्यक्ति के मन में हिंसा का ज्वार पैदा करती है
और उनका प्रतिरूप अनेक कटुरूपों में मिलता है |
अहिंसा की साधना का अर्थ है -
सदा विनम्र रहना और सबको अपने जैसा मानना |
भगवान महावीर ने कहा है -
अपने आपको न हीन समझो और न ऊंचा समझो |
खुद को तुच्छ मानने वाला व्यक्ति घबराहट का शिकार हो जाता है |
वह अकाल में ही काल-कवलित हो जाता है |
हीन वृत्ति वाला मनुष्य अपना, समाज और देश का भला नहीं कर सकता |
दूसरों को हीन और अपने को ऊंचा मानना वह उसका लक्षण है |
यह असमानता की प्रवृत्ति व्यक्ति के मन में हिंसा का ज्वार पैदा करती है
और उनका प्रतिरूप अनेक कटुरूपों में मिलता है |
अहिंसा की साधना का अर्थ है -
सदा विनम्र रहना और सबको अपने जैसा मानना |
भगवान महावीर ने कहा है -
अपने आपको न हीन समझो और न ऊंचा समझो |
खुद को तुच्छ मानने वाला व्यक्ति घबराहट का शिकार हो जाता है |
वह अकाल में ही काल-कवलित हो जाता है |
हीन वृत्ति वाला मनुष्य अपना, समाज और देश का भला नहीं कर सकता |
No comments:
Post a Comment