Thursday, July 11, 2013

साध्वीजी और हाथी


साध्वी मोहनांजी ( राजगढ़ ) आसाम की यात्रा कर रही थी |
वहां घोर जंगल में विशालकाय जंगली हाथी सामने आ गया |
साध्वीजी वहीँ खड़ी हो गईं |
इधर साध्वीजी; उधर हाथी |
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आमने-सामने दोनों !
दोनों मौन !!
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साध्वी मोहनांजी इस विकट स्थिति में
" चैत्य पुरुष जग जाए "
इस मन्त्र समन्वित गीत के पदों को गुनगुनाने लगी |
यह गीत अभय का मन्त्र बन गया |
गीत की लहरियों ने पुरे वातावरण में अभय का संचार कर दिया |
सस्वर गीत के शक्तिशाली प्रकम्पनों ने विशालकाय हाथी के
अवचेतन मन को प्रभावित किया |
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साध्वीजी मंत्रपुरित गीत के गायन में तन्मय बनी रहीं |
न वह हाथी एक कदम आगे बढ़ा,
न साध्वीजी ने एक कदम पीछे रखा |
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कुछ क्षण बीते !!!
हाथी कुछ पीछे हटा,
दूसरी दिशा में मुड़ गया |


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