मेरा अध्ययन -
पूज्य कालूगणी कहा करते थे -
" बातेरी की बिगड़े, जो बातूनी होता है,
बातों ही में रस लेता है,
पढ़ने में रस नहीं लेता, वह बिगड़ जाता है |"
आचार्य श्री तुलसी मुझे समझाते -
" अभी तुम् बातें करोगे तो जीवन भर दूसरों के नियंत्रण में रहना होगा |
इस समय अध्ययन करोगे तो बड़े होने पर स्वतंत्र हो जाओगे |
फिर चाहे कितनी बातें करना, कोई टोकनेवाला नहीं होगा |"
सचमुच आकर्षण की धारा बदल गई |
मन अधिक से अधिक ज्ञानार्जन के लिए उत्सुक हो गया |
पूज्य कालूगणी कहा करते थे -
" बातेरी की बिगड़े, जो बातूनी होता है,
बातों ही में रस लेता है,
पढ़ने में रस नहीं लेता, वह बिगड़ जाता है |"
आचार्य श्री तुलसी मुझे समझाते -
" अभी तुम् बातें करोगे तो जीवन भर दूसरों के नियंत्रण में रहना होगा |
इस समय अध्ययन करोगे तो बड़े होने पर स्वतंत्र हो जाओगे |
फिर चाहे कितनी बातें करना, कोई टोकनेवाला नहीं होगा |"
सचमुच आकर्षण की धारा बदल गई |
मन अधिक से अधिक ज्ञानार्जन के लिए उत्सुक हो गया |
No comments:
Post a Comment