जल तत्व
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जल तत्व का स्थान है -
स्वास्थ्य केंद्र ( स्वाधिष्ठान चक्र )
कान, सिर के बाल और हड्डियों में जलीय परमाणुओं की विद्दमानता है |
अनामिका अंगुली को अंगूठे से दबाने पर शरीर में जलतत्व का संतुलन होता है |
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आंसू, कफ़, थूक, रक्त, प्रस्वेद, श्लेष्म आदि
पर इस तत्व का नियंत्रण है |
इसकी अधिकता से गैस, ह्रदय पर असर,
मुख फीका, हकलाना, चमड़ी में कम्पन आदि रोग होते हैं |
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इस तत्व पर नियंत्रण होने से भूख-प्यास शांत होती है और
मैत्री का विपाक होता है |
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२१ मार्च से २० जून तक शरीर में जल तत्व की प्रधानता रहती है |
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