Wednesday, July 10, 2013

आत्मदर्शन

आत्मदर्शन
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आत्मा के द्वारा आत्मा को देखो |
यह आत्मदर्शन का एक संकेत है |
चैतन्य जगत में आत्मा एक है |
वह कषाय ( क्रोध, मान, माया, लोभ ) से परिवृत्त भी है |
उसके अनेक रूप बन जाते हैं |
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देखने वाली है --
चैतन्य स्वरुप आत्मा और
उसके नाना रूप दृश्य बनते हैं |
आत्मदर्शन -
मैं कौन हूं                            मैं कहां हूं
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* वासना पुरुष              काम केंद्र की चेतना सक्रिय
* इच्छा पुरुष                नाभि की चेतना सक्रिय
* आनंद पुरुष                ह्रदय की चेतना सक्रिय
* प्राण पुरुष                  नासाग्र की चेतना सक्रिय
* प्रज्ञा पुरुष                  दर्शन केंद्र की चेतना सक्रिय


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