बैल है, वकील नहीं !!!
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एक वकील ने तेली को कोल्हू चलाते देखा |
बैल की दोनों आंखों पर पट्टी बंधी थी |
वकील ने पट्टी बांधने का कारण पूछा |
तेली ने कहा -
" इसे पता न चले कि मैं एक ही जगह पर चक्कर काट रहा हूं,
इसलिए और दूसरी बात यह कि
इसे पता न चले कि मैं इसके पीछे नहीं हूं |"
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तभी वकील का ध्यान बैल के गले में बंधी घंटी की ओर गया
तो उसने पूछा " और यह घंटी किसलिए ?"
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तेली ने कहा -
" घंटी न बजने से मुझे पता चल जाता है कि
बैल चल नहीं रहा है, बल्कि खड़ा हो गया है |
उस समय मैं इसकी पीठ पर फिर से धौल जमा देता हूं
और यह चलने लगता है |"
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वकील ने पता नहीं क्या सोचा,
फिर बोला -
" बैल के चलने से घंटी बजती है,
लेकिन बिना चले भी तो घंटी बजाई जा सकती है |
अगर बैल खड़े-खड़े अपना सिर हिलाता रहे
तो भी घंटी बजेगी |
ऐसे में तुम्हें कैसे पता चलेगा कि
बैल खड़ा हो गया है ?"
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तेली वकील के प्रश्न पर प्रश्न और उसके तर्क के चिढ़ गया |
उसने कहा -
" श्रीमान ! यह बैल है, कोई वकील नहीं है |
इतनी चालाकी इसे नहीं आती,
अन्यथा कोल्हू में जुटने की बजाय काला कोट पहनकर
यह भी अदालत में खड़ा होता |"
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
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