एक व्यक्ति जापान गया |
वहां उपवन में घूम रहा था |
देखा, देवदार के वृक्ष ३००-४०० फीट ऊंचे हैं |
आकाश को छू रहे हैं |
आगे चला |
देखकर हैरान रह गया कि कुछ देवदार के वृक्ष अत्यंत बौने हैं |
उनकी ऊंचाई ३-४ फीट ही है |
उसने माली से पूछा |
माली ने बताया - " जिनकी जडें काट दी जाती है, वे ३-४ फीट के रह जातें हैं |
जिनकी जडें काटी नहीं जाती, वे ३००-४०० फीट के हो जाते हैं |
श्रद्धा जड़ है, वह जिनकी कट जाती है, वोह व्यक्तित्व बौना रह जाता है |
जिनकी श्रद्धा मज़बूत रहती है वोह व्यक्तित्व लहलहाने लगते हैं |
बढ़ता वही है, जिनकी जडें ज़मीन में गहरी चली गयी है |
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