महात्मा महाप्रज्ञ
दीक्षा के समय सरदारशहर में सेठ सुमेरमलजी दुगड़ के यहाँ से
छोटी घोड़ी मंगाई गयी ,क्योंकि नथमल छोटा था
श्री गणेशदासजी गधैया के परिवार ने इस प्रकार जिम्मा निभाया मानो उनके परिवार के कोई सदस्य दीक्षा ले रहा हो
दीक्षा के बाद आचार्य कालूगणी ने मुनि नथमल को कहा
" तुम जाओ, तुलछू ( मुनि तुलसी ) के पास सीखो "
दीक्षा के समय सरदारशहर में सेठ सुमेरमलजी दुगड़ के यहाँ से
छोटी घोड़ी मंगाई गयी ,क्योंकि नथमल छोटा था
श्री गणेशदासजी गधैया के परिवार ने इस प्रकार जिम्मा निभाया मानो उनके परिवार के कोई सदस्य दीक्षा ले रहा हो
दीक्षा के बाद आचार्य कालूगणी ने मुनि नथमल को कहा
" तुम जाओ, तुलछू ( मुनि तुलसी ) के पास सीखो "
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