करुणा सागर लहराया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
जिन शासन को चमकाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
योगीश्वर ज्ञानी-ध्यानी, जग के अनुपम अवदानी |
अदभुत सौरभ महकाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
कालू कर पाई दीक्षा, तुलसी से पाई शिक्षा |
निज प्रज्ञा को सरसाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
नत्थू सा भोला बालक, वह बना संघ संचालक |
आरोहण पंथ दिखाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
मुख से मन्त्राक्षर झरते, अमृत कण से घंट भरते |
सद्ज्ञान सिंधु गहराया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
शिशु के जैसी कोमलता, माता के सम वत्सलता |
ऋजुता का नीर बहाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
वय नौ दशकों की मात्रा, तुम चले अहिंसा यात्रा |
पथ समाधान का पाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
सम्मान अनगिनत पाए, गण को नव शिखर चढाऐ |
यह विश्व क्षितिज गुंजाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
जिस भू पर संयम पाया, की वहीँ विसर्जित काया |
सरदारशहर ने पाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
यह जग सपने की माया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
तेरे पथ को अपनाएं, निज प्रज्ञा दीप जलाएं ||
है महाश्रमण का साया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
युग-युग सन्देश रहेगा, जग को उद्बोधन देगा ||
यशगान अमरता पाया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
करुणा सागर लहराया रे.......................
जिन शासन को चमकाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
योगीश्वर ज्ञानी-ध्यानी, जग के अनुपम अवदानी |
अदभुत सौरभ महकाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
कालू कर पाई दीक्षा, तुलसी से पाई शिक्षा |
निज प्रज्ञा को सरसाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
नत्थू सा भोला बालक, वह बना संघ संचालक |
आरोहण पंथ दिखाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
मुख से मन्त्राक्षर झरते, अमृत कण से घंट भरते |
सद्ज्ञान सिंधु गहराया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
शिशु के जैसी कोमलता, माता के सम वत्सलता |
ऋजुता का नीर बहाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
वय नौ दशकों की मात्रा, तुम चले अहिंसा यात्रा |
पथ समाधान का पाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
सम्मान अनगिनत पाए, गण को नव शिखर चढाऐ |
यह विश्व क्षितिज गुंजाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
जिस भू पर संयम पाया, की वहीँ विसर्जित काया |
सरदारशहर ने पाया रे, महाप्रज्ञ अवतार ||
यह जग सपने की माया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
तेरे पथ को अपनाएं, निज प्रज्ञा दीप जलाएं ||
है महाश्रमण का साया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
युग-युग सन्देश रहेगा, जग को उद्बोधन देगा ||
यशगान अमरता पाया रे, महाप्रज्ञ अवतार |
करुणा सागर लहराया रे.......................
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