मनुष्य ऐसा क्यों करता है ?
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मनुष्य का क्रोध उपशांत नहीं है,
इसलिए वह दूसरों को अपना शत्रु बना लेता है |
उसका मन शांत नहीं है,
इसलिए वह अपने को बड़ा और दुसरे को छोटा मानता है |
उसकी माया उपशांत नहीं है,
इसलिए वह दुसरे के साथ प्रवंचनापूर्वक व्यवहार करता है |
उसका लोभ उपशांत नहीं है,
इसलिए वह स्वार्थ की सिद्धि के लिए दुसरे के स्वार्थों का विघटन करता है |
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
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मनुष्य का क्रोध उपशांत नहीं है,
इसलिए वह दूसरों को अपना शत्रु बना लेता है |
उसका मन शांत नहीं है,
इसलिए वह अपने को बड़ा और दुसरे को छोटा मानता है |
उसकी माया उपशांत नहीं है,
इसलिए वह दुसरे के साथ प्रवंचनापूर्वक व्यवहार करता है |
उसका लोभ उपशांत नहीं है,
इसलिए वह स्वार्थ की सिद्धि के लिए दुसरे के स्वार्थों का विघटन करता है |
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
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