विकथा = स्त्री कथा, भक्त कथा ( भोजन सम्बन्धी बातें ), देश कथा, राज कथा आदि-आदि का परिहार नहीं होता,
निंदा, चुगली, पर-परिवाद का परिहार नहीं होता,
तब तक स्वाध्याय में रूचि नहीं हो सकती |
क्योंकि तत्व ज्ञान इतना रुखा है,
जिसके प्रति रस पैदा होना मुश्किल है |
~ आचार्य महाप्रज्ञ
निंदा, चुगली, पर-परिवाद का परिहार नहीं होता,
तब तक स्वाध्याय में रूचि नहीं हो सकती |
क्योंकि तत्व ज्ञान इतना रुखा है,
जिसके प्रति रस पैदा होना मुश्किल है |
~ आचार्य महाप्रज्ञ
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