चक्रव्यूह को कैसे तोडें ?
एक भाव आया और एक तरह का रसायन बन गया
और एक अलग भाव आया और फिर एक अलग प्रकार के भाव का निर्माण हो गया |
उस चक्र को कैसे पकडें और कहां से तोडें?
इसके लिए जरूरी है एक लंबी और अनवरत चलनेवाली साधना |
जो व्यक्ति अन्यत्व ( आत्मा भिन्न : शरीर भिन्न ) अनुप्रेक्षा की साधना में प्रवेश करेगा और
तीन महीने तक उसका अच्छा अभ्यास कर लेगा,
उसे अपनी शारीरिक स्थितियों से निपटने की कला आ जायेगी,
कष्ट पर से चेतना को हटाने का अभ्यास हो जाएगा |
~ आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की पुस्तक " अपना दर्पण : अपना बिम्ब " से
एक भाव आया और एक तरह का रसायन बन गया
और एक अलग भाव आया और फिर एक अलग प्रकार के भाव का निर्माण हो गया |
उस चक्र को कैसे पकडें और कहां से तोडें?
इसके लिए जरूरी है एक लंबी और अनवरत चलनेवाली साधना |
जो व्यक्ति अन्यत्व ( आत्मा भिन्न : शरीर भिन्न ) अनुप्रेक्षा की साधना में प्रवेश करेगा और
तीन महीने तक उसका अच्छा अभ्यास कर लेगा,
उसे अपनी शारीरिक स्थितियों से निपटने की कला आ जायेगी,
कष्ट पर से चेतना को हटाने का अभ्यास हो जाएगा |
~ आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की पुस्तक " अपना दर्पण : अपना बिम्ब " से
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