गुरुदेव महाप्रज्ञजी -
मुनि नथमलजी ( आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का पहले यही नाम था )
जोर से हँसते थे
गुरुदेव तुलसी ने कहा
" हंसिये ना हुसियार, हँसियाँ हलकाई हुवै
हँसियाँ दोष हज़ार, गुण जावै गहलो बजै "
होशियार आदमी हँसता नहीं है,
क्योंकि हंसने से हल्का पन आता है |
हंसने में हज़ारों दोष हैं |
उससे आदमी के गुण चले जाते हैं और
वह मुर्ख कहलाता है |
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