Acharya Shree Mahapragya
Monday, April 16, 2012
उपयोगी कौन नहीं बन सकता ?
आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का दूसरा प्रिय वाक्य था -
" निर्मलता के साथ-साथ उपयोगी बनना है | "
जो स्वार्थ में रहेगा,
वह उपयोगी नहीं बन सकेगा |
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