भार कहाँ गया ?
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दिल्ली में समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने वार्तालाप के मध्य गुरुदेव से पूछा -
गुरुदेव ! आप अपना दायित्व(महाप्रज्ञजी को युवाचार्य पद सौंपने से) सौंपने के बाद कैसा अनुभव करते हैं ?
---------
पूज्य गुरुदेवश्री तुलसी ने फरमाया -
मैं बहुत ही आनंद का अनुभव कर रहा हूँ |
एक योग्य और सक्षम व्यक्ति को उत्तराधिकार सौंपकर
मैं निश्चिन्त हो गया हूँ |
मुझे कुछ भी चिंता नहीं है |
मैं एकदम हल्का-फुल्का-सा हो गया हूँ |
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वे महानुभाव कुछ क्षण पश्चात् युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी के पास पहुंचे |
युवाचार्यश्री से भी उन्होंने यही प्रश्न पूछा -
एक महान और गरिमापूर्ण दायित्व को ओढ़ने के बाद कैसा लगता हैं ?
क्या आप भार महसूस नहीं करते ?
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युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी -
यह सच है कि
मुझे एक महान आचार्य का उत्तराधिकार मिला है,
लेकिन मैं भारी नहीं हूँ |
मैं आज भी उतना ही हल्का हूँ
जितना युवाचार्य बनने से पूर्व था |
गुरुदेव आज भी उसी निष्ठा से धर्मसंघ के विकास के लिए
कार्यशील हैं,
चिंतित हैं,
सचेष्ट हैं,
इसलिए मैं सर्वथा निश्चिन्त भी हूँ |
यह नया दायित्व न मेरी चिंता बढ़ा पाया है,
न भार बढ़ा पाया है |
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युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी के इस उत्तर को सुनकर सब विस्मित रह गए |
उनके गले नहीं उतर रहा था यह उत्तर |
उन्होंने फिर पूछा -
युवाचार्यश्री !
गुरुदेव कहते हैं - मैं भारी नहीं हूँ |
आप कहते हैं - मैं भी भारी नहीं हूँ |
आखिर वह भार गया कहाँ ?
न वह गुरुदेव के पास है,
न आपके पास है तो वह भार है किसके पास ?
यह बात हमारी समझ के बाहर है |
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महाप्रज्ञजी यह सुनकर मुस्करा उठे |
आपकी इस स्मित मुस्कान में उस प्रश्न का उत्तर छिपा था |
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दिल्ली में समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने वार्तालाप के मध्य गुरुदेव से पूछा -
गुरुदेव ! आप अपना दायित्व(महाप्रज्ञजी को युवाचार्य पद सौंपने से) सौंपने के बाद कैसा अनुभव करते हैं ?
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पूज्य गुरुदेवश्री तुलसी ने फरमाया -
मैं बहुत ही आनंद का अनुभव कर रहा हूँ |
एक योग्य और सक्षम व्यक्ति को उत्तराधिकार सौंपकर
मैं निश्चिन्त हो गया हूँ |
मुझे कुछ भी चिंता नहीं है |
मैं एकदम हल्का-फुल्का-सा हो गया हूँ |
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वे महानुभाव कुछ क्षण पश्चात् युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी के पास पहुंचे |
युवाचार्यश्री से भी उन्होंने यही प्रश्न पूछा -
एक महान और गरिमापूर्ण दायित्व को ओढ़ने के बाद कैसा लगता हैं ?
क्या आप भार महसूस नहीं करते ?
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युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी -
यह सच है कि
मुझे एक महान आचार्य का उत्तराधिकार मिला है,
लेकिन मैं भारी नहीं हूँ |
मैं आज भी उतना ही हल्का हूँ
जितना युवाचार्य बनने से पूर्व था |
गुरुदेव आज भी उसी निष्ठा से धर्मसंघ के विकास के लिए
कार्यशील हैं,
चिंतित हैं,
सचेष्ट हैं,
इसलिए मैं सर्वथा निश्चिन्त भी हूँ |
यह नया दायित्व न मेरी चिंता बढ़ा पाया है,
न भार बढ़ा पाया है |
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युवाचार्यश्री महाप्रज्ञजी के इस उत्तर को सुनकर सब विस्मित रह गए |
उनके गले नहीं उतर रहा था यह उत्तर |
उन्होंने फिर पूछा -
युवाचार्यश्री !
गुरुदेव कहते हैं - मैं भारी नहीं हूँ |
आप कहते हैं - मैं भी भारी नहीं हूँ |
आखिर वह भार गया कहाँ ?
न वह गुरुदेव के पास है,
न आपके पास है तो वह भार है किसके पास ?
यह बात हमारी समझ के बाहर है |
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महाप्रज्ञजी यह सुनकर मुस्करा उठे |
आपकी इस स्मित मुस्कान में उस प्रश्न का उत्तर छिपा था |
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