मैंने देखा है,
शायद आपने भी देखा होगा |
४०-५० वर्ष पहले जो आकाश को छूते थे,
आज धरती पर भी वे लड़खड़ा रहे हैं |
उनका वह धन, वह ऐश्वर्य जाने कहाँ खो गया |
जिनका नाम पहली पंक्ति में आता था,
उन्हें आज कोई जानता भी नहीं है |
जिनका वैभव इन्द्र के ऐश्वर्य को भी मात करता था,
उनके शाही महलों में अब किराए की दुकानें चलती है |
कारण ?
समय !!!
समय का अंतर |
समय परिवर्तनशील है,
वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता |
किसी को माफ नहीं करता |
न् झोपडी पर रहम !!!
न् महल का लिहाज !!!
~आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी
शायद आपने भी देखा होगा |
४०-५० वर्ष पहले जो आकाश को छूते थे,
आज धरती पर भी वे लड़खड़ा रहे हैं |
उनका वह धन, वह ऐश्वर्य जाने कहाँ खो गया |
जिनका नाम पहली पंक्ति में आता था,
उन्हें आज कोई जानता भी नहीं है |
जिनका वैभव इन्द्र के ऐश्वर्य को भी मात करता था,
उनके शाही महलों में अब किराए की दुकानें चलती है |
कारण ?
समय !!!
समय का अंतर |
समय परिवर्तनशील है,
वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता |
किसी को माफ नहीं करता |
न् झोपडी पर रहम !!!
न् महल का लिहाज !!!
~आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी
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