आदमी अपने भाग्य को कैसे बढ़ा सकता है ?
आगम साहित्य में उत्तर दिया गया -
पाणाणुकंम्पयाए, भूयाणुकंपयाए, जीवाणुकम्पयाए भुज्जो-भुज्जो सायं उवचिणाई |
जिस व्यक्ति में हर प्राणी के लिए अनुकम्पा का भाव होता है,
वह व्यक्ति अपने भाग्य को बढ़ा सकता है |
~ आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की ' महाप्रज्ञ ने कहा भाग - ३९ ' से
( महाप्रज्ञ ने कहा - पूज्य गुरुदेव के प्रवचनों का संकलन है )
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