कुछ बाबा लोग हैं जो स्वयं को साधू और सन्यासी कहते हैं |
धन को सब बुराइयों की जड़ बताते हैं
और चढावे के लिए लालायित भी रहते हैं |
वे भक्तों को मालामाल होने का आशीर्वाद देते हैं
और आश्रम में दानपेटिका रखवाते हैं |
स्वयं दक्षिणा के आकांक्षी हैं
और भक्त को भी आशीर्वाद देते हैं कि
जाओ, तुम् पर दौलत की बरसात होगी |
बड़ी विरोधाभासी बात है |
जो स्वयं पाने को आतुर है,
वह दुसरे को क्या देगा ?
- आचार्य श्री महाप्रज्ञजी
धन को सब बुराइयों की जड़ बताते हैं
और चढावे के लिए लालायित भी रहते हैं |
वे भक्तों को मालामाल होने का आशीर्वाद देते हैं
और आश्रम में दानपेटिका रखवाते हैं |
स्वयं दक्षिणा के आकांक्षी हैं
और भक्त को भी आशीर्वाद देते हैं कि
जाओ, तुम् पर दौलत की बरसात होगी |
बड़ी विरोधाभासी बात है |
जो स्वयं पाने को आतुर है,
वह दुसरे को क्या देगा ?
- आचार्य श्री महाप्रज्ञजी
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